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मसूद अजहर वैश्विक आतंकी घोषित, भारत ने निभाई निर्णाय​क भूमिका

 Ritu |  2 May 2019 7:15 AM GMT

मसूद अजहर वैश्विक आतंकी घोषित, भारत ने निभाई निर्णाय​क भूमिका

नई दिल्ली। पुलवामा ​​हमले का मास्टर माईंड मौलाना मसूद अजहर वैश्विक आतंकी घोषित हो चुका है। मसूद अजहर को वैश्वि​क आतंकी घोषित करने में भारत ने निर्णाय​क भूमिका निभाई है। बता दे कि भारत ने जो सबूत अंतरराष्‍ट्रीय जगत को सौंपे, उसी के आधार पर अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किया गया।

दरअसल भारत ने 1994 में मसूद अजहर को जम्‍मू-कश्‍मीर के अनंतनाग में पकड़ा था। उसके बाद जांच एजेंसियों ने उससे पूछताछ में कई राज उगलवाए थे। इसके आधार पर भारतीय खुफिया एजेंसियों ने अजहर के खिलाफ कई सबूत जुटाए थे। उस रिपोर्ट में उसने खुद स्‍वीकार किया था कि वह आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ है। खुफिया एजेंसियों की उस रिपोर्ट से जो सबूत भारत ने जुटाए, उनके जरिए अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करवाने में बड़ी भूमिका रही है। मसूद अजहर को कई बार कई बार वैश्विक आतं​की घोषित किये जाने के प्रयास को चीन ने वीटो पावर का इस्तेमाल करके कई बार भारत के प्रयास में अड़ंगा लगाया हैं। लेकिन इस बार चीन ने अपने वीटो पवार हटा कर भारत का साथ देते हुए मोहम्‍मद सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने में भारत का साथ दिया और 1 मई 2019 को मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया गया।

मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने में दुनियाभर के तमाम देशों संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा समिति के सदस्य देश अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस लगातार कोशिश कर रहे थे। जिसके बाद आज मसूद अजहर वैश्विक आतंकी घोषित हो गया। बता दे कि अंतरराष्ट्रीय विरादरी से मसूद अजहर के ग्लोबल आतंकवादी घोषित होने के बाद अब पाकिस्तान के लिए भी उसे छिपा पाना आसान नहीं होगा। हालांकि, पाकिस्तान पूर्व में अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को चोरी-छिपे शरण देने में कामयाब रहा था।

ग्लोबल आतंकी घोषित पाकिस्तानी मौलाना मसूद अजहर के खिलाफ करीब पांच सौ उलमा-ए-कराम ने फतवा जारी कर उसे इस्लाम से खारिज किया था। मसूद अजहर को दुनिया में इस्लाम की छवि खराब करने के प्रतीक के तौर पर मानते हुए यह फैसला लिया गया था। इसके साथ ही आतंकी संगठनों से जुड़ा साहित्य, सोशल साइट्स आदि से दूरी का पैगाम दिया गया था।

पिछले एक दशक से अजहर के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र की तरफ से प्रतिबंध घोषित करवाने मे जुटे भारत की कूटनीतिक कोशिशों को बुधवार को सफलता तब मिली जब चीन ने अपना वीटो पावर हटा कर इसका समर्थन कर दिया। पीएम नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की एक बड़ी जीत बताते हुए कहा है कि इससे आतंकवाद को जड़ से मिटाने की कोशिशों को मदद मिलेगा।

पुलवामा में आतंकी हमले के 75 दिन बाद भारत को बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने जैश-ए-मुहम्मद के सरगना आतंकी मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया है। यूएन के इस फैसले के बाद अब आतंकी मसूद अजहर पर शिकंजा कसना शुरू हो जाएगा। अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित होने वाले शख्स पर कई वित्तीय पाबंदियां लगाई जाती हैं।

पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने की पिछले 10 वर्षों में यह चौथी कोशिश थी। दरअसल, चीन संयुक्त राष्ट्र के 15 सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद का अकेला ऐसा देश है जो मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के प्रस्‍ताव का विरोध करता रहा है। भारत समेत दुनियाभर ने किया मसूद अजहर पर पाबंदी का स्वागत

भारत समेत दुनिया भर में आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने का स्वागत किया गया है। लेकिन इसको लेकर संदेह भी जताया गया है कि क्या इस कदम से पाकिस्तान पर आतंकवाद को अपनी राष्ट्र नीति के तौर पर इस्तेमाल करने से रोकने में मदद मिलेगी।

भारत में कई आतंकी घटनाओं के सूत्रधार रहे मौलाना मसूद अजहर पर अंतरराष्ट्रीय पाबंदी ने भारत और भारत सरकार की ताकत को तो सिद्ध कर ही दिया है, इसके चुनावी असर को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। भाजपा ने इसके सहारे 'मोदी है तो मुमकिन है' के चुनावी नारे को धार दे दिया है। वहीं माना जा रहा है कि इसे बहुमत वाली शक्तिशाली सरकार बनाने का मुद्दा भी बनाया जाएगा। बालाकोट का सबूत मांग रहे विपक्षी दलों को कठघरे में खड़ा करते हुए यह पूछा जाएगा कि जब अंतरराष्ट्रीय ताकतें भारत की ताकत को महसूस कर रही है तो फिर घर के अंदर सवाल खड़ा क्यों किया जा रहा है। परोक्ष रूप से इसे चीन पर जीत का भी संदेश बनाया जाएगा।

भारत ने जिस तरह से लगातार कोशिश के बाद मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करवाने में सफलता प्राप्त की है वह पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चेतावनी है। अगर पाकिस्तान के हुक्मरान अब भी भारत में आतंकी हमला करने वाले संगठनों को पनाह देना जारी रखेंगे तो उनके खिलाफ जल्द ही एफएटीएफ (फाइनेंसिएल एक्शन टास्क फोर्स) का फंदा भी तैयार हो सकता है। भारत एफएटीएफ में पाकिस्तान को घेरने के लिए यूएन के इस फैसले को भी उठाएगा।

आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्‍मद का सरगना बनने वाला यह मसूद अजहर पाकिस्‍तान के बहावलपुर में 10 जुलाई, 1968 को जन्‍मा था। इसके नौ भाई-बहन थे। अजहर का पिता अल्लाह बख्श शब्बीर एक सरकारी स्कूल का

प्रधानाध्यापक था। उसका परिवार डेयरी और पॉल्ट्री के कारोबार से जुड़ा था। इस आतंकी ने बानुरी नगर, कराची के जामिया उलूम उल इस्लामिया नामक मदरसे से तालीमा हासिल की। और वहीं उसका सम्पर्क हरकत-उल-अंसार नामक संगठन से हुआ। जो उस वक्त अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन था। वह उर्दू पत्रिका साद-ए-मुजाहिद्दीन और अरबी पत्रिका सावत-ए-कश्मीर का संपादक भी था।

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