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बिग डेटा बनायेगा चीन को और अधिक ताकतवर?

 Narender Dhawan |  10 Jun 2019 3:22 PM GMT

big data

रंजीत कुमार वरिष्ठ पत्रकार

चीन सरकार ने कुईचओ प्रांत में सूचना तकनीक और इंटरनेट की दुनिया में क्रांति पैदा करने वाली बिग डेटा तकनीक पर एक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी और सम्मेलन का आयोजन मई के अंतिम सप्ताह में किया। इस सम्मेलन में चीन ने न केवल बिग डेटा के जरिये अपनी अर्थव्यवस्था को चमकाने की बात की बल्कि अपने बिग डेटा का इस्तेमाल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

बिग डेटा के जरिये लाखों आंकड़ों और सूचनाओं का त्वरित विश्लेषण किया जा सकता है। इस सम्मेलन में 30 से अधिक देशों के अग्रणी सूचना तकनीक विशेषज्ञ और कम्पनियों ने भाग लिया। इसमें भारत की भी दो दर्जन से अधिक कम्पनियां शामिल थीं।

बिग डेटा के जरिये जहां किसी देश की अर्थव्यवस्था को चमकाया जा सकता है वहीं चीनी विशेषज्ञ अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को भी मजबूत करने के लिये इसके इस्तेमाल करने की योजना लागू कर रहे हैं। सकते इसी इरादे से चीन की स्टेट काउंसिल ने राष्ट्रीय सामरिक ताकत को मजबूत करने के लिये बिग डेटा के विकास का एक नैशनल एक्शन प्लान तैयार किया है। चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये विज्ञान, तकनीक और उद्योग के विकास के लिये राज्य प्रशासन ने तीन साल का योजनाबद्ध कार्यक्रम तैयार किया है।

बिग डेटा के जरिये रक्षा क्षेत्र में चीनी सैन्य बलों की आधारभूत क्षमता को मजबूत किया जा सकेगा। बिग डेटा के जरिये चीन अपने विज्ञान और तकनीक संस्थानों और रक्षा उद्योंगों के बीच बेहतर तालमेल बनाएगा। चीनी विशेषक्षों के मुताबिक बिग डेटा के जरिये सैन्यसाज सामान के विकास और शोध एवं विकास गतिविधियों के बीच तालमेल बेहतर किया जा सकता है।

सैन्य संस्थानों और विज्ञान एवं तकनीकी संगठनों के बीच आदान प्रदान को गहरा करने के लिये चीन ने विज्ञान के अग्रणी क्षेत्रों जैसे परमाणु, अंतरिक्ष वैमानिकी, युद्धपोत , वैमानिकी , शस्त्र और इलेक्ट्रानिक्स के विशेषज्ञों के बीच समन्वय स्थापित किया है। सैन्य क्षेत्रों में काम आने वाले असैनिक उच्च तकनीक संस्थानों के बीच भी तालमेल स्थापित किया जा रहा है। बिग डेटा के जरिये असैनिक और सैन्य क्षेत्रों के बीच एकीकरण किया जा सकता है ताकि उसका राष्ट्रीय सामरिक ताकत मजबूत करने में इस्तेमाल किया जा सके।

आधुनिक अर्थव्यवस्था के नये सुपरफास्ट ड्राइवर के तौर पर विकसित हो रही बिग डेटा टेकनालाजी किसी देश और उसके समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली साबित होगी। बिग डेटा तकनीक को हम इस तरह से समझ सकते हैं कि यह आंकड़ों और सूचनाओं की खान से सोना रूपी ज्ञान निकाल सकती है। बिग डेटा के क्षेत्र में जो क्रांति हो रही है उसने आर्थिक खेल के नियम बदलने शुरु कर दिये हैं। चीन ने इस तकनीक में बड़ा कदम रख कर लम्बी छलांगें लगानी शुरु कर दी है और इसकी बदौलत वह न केवल अपनी चमक खोती अर्थव्यवस्था में चार चांद लगाने की उम्मीद कर रहा है बल्कि चीन के आम लोगों को भी बिग डेटा तकनीक से भारी लाभ मिलने का भरोसा चीन का राजनीतिक नेतृत्व दे रहा है। करीब पांच साल पहले इस बिग डेटा तकनीक का चीन में व्यापक इस्तेमाल करने का फैसला किया गया और अब एक राष्ट्रीय संकल्प के तौर पर पूरा देश इसमें जुट गया है।

चीनी राष्ट्रपति शी चिन फिंग ने बिग डेटा तकनीक के व्यापक इस्तेमाल की राष्ट्रीय नीति घोषित की है और चीन के पूरे सूचना तकनीक तंत्र को इसमें झोंकने में लगे हैं। रोचक बात यह है कि चीन को अपने बिग डेटा उद्योग के तेजी से विकास और कुछ सालों के भीतर इस लक्ष्य को हासिल करने में भारतीय साफ्टवेयर विशेषज्ञों की मदद मांगने में कोई झिझक नहीं हो रही है। वास्तव में भारतीय सूचना तकनीक विशेषज्ञ चीन के बिग डेटा उद्योग की रीढ़ के तौर पर देखे जा रहे हैं। सम्मेलन में भाग ले रहे प्रसिद्ध क्रिप्टोलाजिस्ट ह्विटफील्ड दिफे के मुताबिक वास्तव में आज का इंटरनेट समाज तीन मुख्य कारकों पर अपनी आधारशिला मजबूत कर रहा है। यह है – बिग डेटा , आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी कृत्रिम बुदिध और साइबर सुरक्षा। बिग डेटा की कोई आकार सीमा नहीं होती। आज हम करोड़ों आंकड़ों का क्षण भर में विश्लेषण करने लगे हैं। वास्तव में कम्प्युटरों का आविष्कार आंकड़ों के त्वरित विश्लेषण और प्रबंध के लिये ही किया गया था। इसके जरिये करोडों आंकडों , इनकी विभिन्न प्रणाली और भिन्न भाषाएं और गति को हम दिन के बदले घंटों या सेकंडों में हासिल कर ले रहे हैं। वास्तव में बिग डेटा की सभी विशेषताएं आज से 75 साल पहले भी मौजूद थीं लेकिन आज हम इन आंकडों को दस टु द पावर 15 या 18 के दायरे में विश्लेषित कर सक रहे हैं। इंटरनेट और डब्ल्यू-डब्ल्यू-डब्ल्यू के प्रादुर्भाव ने श्रेष्ठ स्तर के डेटा इकट्ठा कर हमें इसके विश्लेषण करने की क्षमता दी है। इससे सरकारें अपना प्रशासन सक्षम बना सकती है। अर्थव्यवस्था को अधिक सक्रिय कर सकती है । इससे खुलापन और पारदर्शिता आती है।

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