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'गृह मंत्री ने बड़े ऑपरेशन की नीति बनाई': शिवसेना

 Ritu |  6 Jun 2019 6:26 AM GMT

अमरनाथ यात्रा शांति से संपन्न हो और उसके बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा का चुनाव कराया जाए

नई दिल्ली। नई मोदी सरकार में गृहमंत्री बने अमित शाह द्वारा जम्मू कश्मीर में परिसीमन के प्रस्ताव का शिवसेना ने स्वागत किया है। शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने पार्टी के मुखपत्र सामना के जरिए अमित शाह की तारीफ की है। शिवसेना ने लिखा है, 'अमित शाह ने क्या करना तय किया है, यह स्पष्ट हो गया है। जम्मू-कश्मीर की समस्या का बड़ा ऑपरेशन करने के लिए उसे उन्होंने टेबल पर लिया है। कश्मीर घाटी में हमेशा के लिए शांति स्थापित करना ये मामला तो है ही, साथ ही कश्मीर सिर्फ हिंदुस्तान का हिस्सा है, ऐसा पाक तथा अलगाववादियों को अंतिम संदेश देना भी जरूरी है। अमित शाह उस दिशा में कदम उठा रहे हैं।'

इस लेख में आगे लिखा है, 'फिलहाल कश्मीर में राष्ट्रपति शासन जारी है। जल्द ही अमरनाथ यात्रा शुरू होगी। ऐसा माहौल दिखाई दे रहा है। अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा सीटों का 'भूगोल' बदलना तय किया है और जम्मू-कश्मीर का अगला मुख्यमंत्री हिंदू ही होगा, इसके लिए मतदाता क्षेत्रों का परिसीमन अर्थात डिलिमिटेशन करना तय किया है।

दिल्ली में उन्होंने कश्मीर की सुरक्षा के संदर्भ में एक बैठक की। उस बैठक में कश्मीर में किए जानेवाले संभावित 'डिलिमिटेशन' पर भी चर्चा हुई, इस तरह की खबरें प्रकाशित हुई हैं। सरकारी स्तर पर इसकी आधिकारिक रूप से पुष्टि भले ही न हुई हो, फिर भी नए गृहमंत्री ने सरकार का इरादा अप्रत्यक्ष तरीके से स्पष्ट कर दिया है यह निश्चित ही कहा जा सकता है।'

शिवसेना ने लिखा, ' जम्मू कश्मीर में परिसीमन न हो इसके लिए राज्य के स्थानीय दल 2002 से केंद्र के सिर पर बैठे हैं। जम्मू-कश्मीर विधानसभा का परिसीमन किया गया तो स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ जाएगा, ऐसा भय हमेशा से दिखाया गया। जिसके आगे पहले की कांग्रेसी सरकार के केंद्रीय गृहमंत्री ने हथियार डाल दिए थे।

अब देश की तस्वीर बदल चुकी है और अमित शाह ने कश्मीर मसले को प्राथमिकता दी है। सरकार फालतू और बेकार की चर्चाओं में समय नहीं गंवाएगी। सरकार निर्णय लेगी और उसे सख्ती से लागू करेगी। नए केंद्रीय गृहमंत्री की यही कार्यप्रणाली दिखाई दे रही है। अब तक मुस्लिम जनसंख्या के दबाव तले जम्मू-कश्मीर की राजनीति की जाती थी।'

जम्मू और कश्मीर इन राज्यों के हिंदू बहुल जम्मू, मुस्लिम बहुल कश्मीर और बौद्ध जनसंख्या की अधिकतावाले लद्दाख ऐसे तीन हिस्से हैं। जम्मू में 37, कश्मीर में 46 और लद्दाख में 4 विधानसभा क्षेत्र हैं। स्वाभाविक रूप से जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सर्वाधिक विधायक कश्मीर घाटी से चुनकर आते हैं। जबकि सच तो यह है कि जम्मू क्षेत्र 'भौगोलिक' रूप से कश्मीर की तुलना में बड़ा है, फिर भी वहां से कम विधायक चुने जाते हैं।

हिंदू मुख्यमंत्री न बने और मुसलमानों को खुश रखा जाए इसी के लिए यह योजना बनाई गई हो इसे अब रोकना होगा। सामना में लिखा है, 'कश्मीर के राजा हरि सिंह हिंदू थे लेकिन स्वतंत्रता के बाद एक बार भी जम्मू-कश्मीर का हिंदू मुख्यमंत्री नहीं बना। जैसे हिंदू के हाथ में सत्ता चली गई तो आसमान टूट पड़ेगा। इस मानसिकता को बदलने की कोशिश कभी नहीं की गई।

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