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पृथ्वीराज चौहान ने बनवाया था दिल्ली का किला राय पिथौरा

 Manish Kumar Gupta |  10 Aug 2018 7:11 AM GMT

क्या आप जानते हैं कि भारत की राजधानी दिल्ली के अंतिम हिंदू शासक महाराजा पृथ्वीराज चौहान का किला दिल्ली में मौजूद है और मजे की बात यह है कि ज्यादातर दिल्ली के निवासी भी यह बात नहीं जानते ।

तो दोस्तों आज मैं आपको बताने आया हूं दिल्ली के ऐसे अनजान दुर्ग किला राय पिथौरा के बारे में जो कि किसी हिंदू राजा द्वारा बनवाया दिल्ली का एकमात्र किला है | जैसा की हम लोग जानते हैं कि दिल्ली शहर की स्थापना तोमर राजवंश के राजा महाराज अनंगपाल ने की थी जिन्होंने दिल्ली से लेकर थानेसर तक के साम्राज्य पर राज्य किया और उसकी राजधानी दिल्ली के नजदीक अनंगपुर, सूरजकुंड में बसाई और बाद में वह अपनी राजधानी को दिल्ली ले आए | महाराजा अनंगपाल ने दिल्ली में एक किला बनवाया जिसका नाम लालकोट रखा गया | महाराजा अनंगपाल द्वितीय जैन धर्म का भी प्रभाव था अंत: कई हिंदू और जैन मंदिरों का निर्माण लालकोट के अंदर करवाया था |

इस किले के वर्तमान में अवशेष क़ुतुब कॉन्प्लेक्स के आसपास देखे जा सकते हैं जहां वृहत विशाल जमीन भूखंड पर इस किले की मोटी - मोटी दीवारें बनी हुई है और अंतिम हिंदू राजा पृथ्वीराज चौहान की एक विशाल मूर्ति वहां पर लगी हुई |

उसी पीढ़ी में आगे महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर के पुत्र महाराजा अनंगपाल द्वितीय तोमर दिल्ली के राजा बने जो कि तोमर वंश के अंतिम राजा थे | महाराजा अनंगपाल की दो बेटियां थी | सुंदरी और कमला (कर्पूरी देवी) । बड़ी बेटी सुंदरी का विवाह कन्नौज के राजा विजयपाल गहड़वाल (राठौर) के साथ हुआ और उससे इतिहास प्रसिद्ध राजा जयचंद हुये। ये वही जयचंद हैं जिनकी बेटी से राजा पृथ्वीराज चौहान ने स्वयंवर किया था और उसे घोड़े पर बिठा के अपहरण विवाह करके ले आये थे और उसके बाद जयचंद ने पृथ्वीराज चौहान से अपने अपमान का बदला लेने के लिए अफगानी व् आक्रमणकारी मुहम्मद गोरी को हिंदुस्तान पर आक्रमण के लिए आमंत्रित किया था | दूसरी ओर छोटी कन्या कमला का विवाह अजमेर के राजा सोमेश्वर चौहान के साथ हुआ, जिनके पुत्र पृथ्वीराज चौहान हुए। राजा अनंगपाल द्वितीय अपनी छोटी कमला (कर्पूरी देवी) बेटी से बहुत प्यार करते थे और उसके पुत्र में ही अपना उत्तराधिकारी देखते थे इसीलिए महाराजा अनंगपाल ने अपने नाती पृथ्वीराज को गोद ले लिया और अपना राजकाज उसे सौंप कर तीर्थ यात्रा को निकल गए थे।

जब युवा पृथ्वीराज चौहान ने दिल्ली का राज्य संभाला तो दिल्ली से अजमेर तक उनका राज हो गया और उनकी राजधानी दिल्ली हो गई | एक अलग किवदंती के अनुसार महाराज अनंगपाल द्वितीय का एक बेटा भी था जिसने मुरैना के पास सिहोनिया नाम का नगर बसाया और कछवाहे राजा की बेटी ककनवती से विवाह किया और ककनमठ नामक इतिहास प्रसिद्ध शिव मंदिर बनवाया था ।

पृथ्वीराज चौहान ने राजा अनंगपाल द्वितीय द्वारा बनाये गये दिल्ली के प्रथम दुर्ग लाल कोट में अपना निवास व दरबार लगाया और उस दुर्ग की चारदीवारी को मजबूत किया और उसको आसपास के क्षेत्रों को पूर्णरूपेण जोड़ दिया और उसकी मजबूत दीवारों को वर्तमान सीरी से लेकर अरावली कि पहाड़ियों तक ले गया जो आज का तुगलकाबाद है | सन 1180 में यह दुर्ग में मुकम्मल हो चुका था | किले के अंदर ही कस्बा बसता था। दीवारें 6 मीटर तक चौड़ी और 18 मीटर तक ऊंची थीं। जो कि वर्तमान के क़ुतुब कॉन्प्लेक्स के आस-पास के बने हुये किले से लेकर तुग़लकाबाद तक ,महरौली और सीरी फोर्ट तक था |

हम सभी जानते हैं कि पृथ्वीराज चौहान का नाम ही राय पिथौरा था और उन्हीं के नाम पर उस किले का नाम दुर्ग राय पिथौरा हो गया जो कि कालांतर में दुर्ग से बदलकर उर्दू का अर्थ लेते हुए किला राय पिथौरा के नाम से प्रसिद्ध हो गया |

अपने अंतिम युद्ध में जब महाराज पृथ्वीराज चौहान मोहम्मद गोरी से पराजित हो गए तब मोहम्मद गोरी ने दिल्ली का राजकाज अपने गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक को सौंप दिया जो कि उनका गुलाम था और खुद वापस अपने देश अफगानिस्तान चला गया था। कुतुबुद्दीन ऐबक एक बेहद कट्टर मुसलमान था उसने किला राय पिथौरा में हिंदू व् जैन बने हुए मंदिरों को बुरी तरह तोड़ डाला और मुस्लिम निर्माण शुरू कर दिया। उन्ही मंदिरों के पत्थरों से उसने कुव्वत उल इस्लाम नामक मस्जिद् बनवाई और वहां भगवान विष्णु की कमल नाल के प्रतीक इमारत ध्रुव स्तम्भ का ध्वंस किया और उस पर से सभी देवताओं की मूर्तियां और हिन्दू प्रतीक चिन्ह तोड़कर और इस्लामिक कुतुबमीनार का रूप दे दिया ।

पौराणिक दृष्टि से देखों तो द्धापर युग में महाभारत की विजय के पश्चात् पांडवों ने जिस नगर को बसाया वह इंद्रप्रस्थ नगर ही आज की दिल्ली है | हिन्दू ग्रंथो के अनुसार दिल्ली को हस्तिनापुर कहते थे | दिल्ली के पुराने किले के पास इंद्रपत नाम का गांव था। माना जाता है कि पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ वहीं थी। इंद्रप्रस्थ की नींव पर ही मुगल शासक हुमायूं ने पुराना किला बनवाया था। कुछ बरस बाद उस पर राजा अनंगपाल ने लालकोट नगरी बसाई। इस हिसाब से हजारो साल बाद पांडव वंश को पुन इन्द्रप्रस्थ को बसाने का मौका मिला,और ये श्रेय अनंगपाल तोमर को मिला |

CA. Manish Kumar Gupta

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