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एमसीडी का नादिरशाही फरमान

 Ritu |  2018-11-13T13:55:04+05:30

एमसीडी का नादिरशाही फरमान

दिल्ली अप टू डेट

नई दिल्ली। सन् 1736 में ईरानी चरवाहा भारत आया और उसने दिल्ली पर आक्रमण कर दिया। दिल्ली की गली—गली में लूट पाट शुरू कर दी और दिल्ली को तहस नहस कर दिया। तथा दिल्ली राजसिहासन तख्ते ताऊस लूट ले गया। आज नादिरशाह के बाद लगभग 280 वर्ष बाद यह हाल एमसीडी के द्वारा किया जा रहा हैं। सुप्रीम कोर्ट और मॉनिटरिंग कमेटी के आदेश के बाद दिल्ली की जनता पर रोजी—रोटी और जीवन को लेकर असमंजस की स्थित हैं। आखिरकर यह स्थित उत्पन्न क्यों हुई? आखिरकर ऐसी नौबत क्यूं आई? आईयें कुछ बातों पर प्रकाश डालतें हैं। आज मास्टर प्लान 2021 के तहत सीलिंग की कार्रवाई की जा रही हैं। जबकि मास्टर प्लान के मुताबिक प्रत्येक वर्ष एमसीडी के अधिकारी औचक निरिक्षण करेंगे और जो भी व्यवस्था मास्टर प्लान के तहत नहीं आती उनकी रिर्पोट बनाकर उन्हें हटवाया जायेंगा। परन्तु ऐसा नही हुआ कोई भी अधिकारी समय पर निरिक्षण के लिए नही आया और कन्वर्जन चार्ज के रूप में धनराशि लेकर सरकारी पैसा और अधिकारी को पैसा देकर जो कार्य रिहायशी क्षेत्र में नही होने चाहिए वह भी होने लगे न केवल अधिकारी अपितु वोट बैंक की खातिर राजनैतिक दलो और नेताओं ने भी इसमें अपना योगदान दिया जो कि तात्कालिक निर्णय थे, यदि भविष्य के प्रति सचेत होते तो शायद आज यह स्थित जनता के सामने न होती। पूरी दिल्ली आज अस्त—वयस्त है, त्योहार के मौसम में भी वीरानी छाई हैं।

एमसीडी के अधिकारी औधोगिक क्षेत्र में आवंटित प्लाट के आधार पर सीलिंग का खौफ दिखाकर अपनी और स्थानीय निगम पार्षद विधायक आदि की जेब गर्म करने में लग गए हैं। लगे हाथ स्थानीय पार्षद एवं विधायक भी जिन्होंने चुनाव में साथ नही दिया उन्हें निशाना बनाकर उन्हें कार्य स्थल पर सील लगवाने मेें कामयाब हो रहें हैं। उस पर एक और आदेश ट्रेड लाइसैंस—सभी दुकानदार साथियों को ट्रेड लाईसेंस बनवानें का एक और आदेश, यहां गौरतलब है कि तीन साल पिछले और 2 साल आगे तक की धनराशि दुकान दारों से मांगी जा रही हैं जबकि अगर जीएसटी हैं तो शायद यह बेमानी लगती हैं। क्यूंकि एक ही चीज के लिए 2 नियम लागू नही होते, यदि होते भी है तो फिर पिछले तीन साल का क्यूं आप प्रति साल लेते यहां भी असमंजस की हालत हैं।

वास्तविकता यह है कि आज दिल्ली की आम जनता अपने जीवन में दो वक्त की रोटी को लेकर भी आशान्वित नही हैं। पता नहीं कब कहां कैसे कोई नया फरमान या कानून आ जाए? हैरत तो इस बात की है कि कोई भी राजनैतिक दल या नेता इस स्थिति भी जनता के साथ नहीं है। जो आम जन मानस का दुख दर्द समझें और राहत दे सके। चाहें बीजेपी हो या दिल्ली में आप सरकार 'सर जी', या कांग्रेस हो आज सभी चुप हैं और दिल्ली की जनता आस में बैठी है कि कोई तो हमारे प्रति हमदर्दी दिखाएं। ये सरासर सरकारी ऐजेन्सीयों एवं घटिया राजनीति एवं नेताओं के कारण हो रहा हैं।

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