Breaking »
  • Breaking News Will Appear Here

सदैव अटल : गुरु को समर्पित एक स्मारक

 Manish Kumar Gupta |  2019-01-22T15:13:15+05:30

मोदी सरकार के काम के प्रति समर्पण, गति और लगन का एक नमूना है मात्र ४५ दिनों में बनाया गया "सदैव अटल स्मारक"। यह बताता है कि अगर सरकार ठान ले तो विकास के निर्माण या अन्य कार्य करना बहुत मुश्किल नहीं। शायद यही वजह है आज देश नरेंद्र मोदी जी के के श्रम और निष्ठा को देख कर स्वीकार कर रहा है।

अपने गुरु श्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 94वीं जयंती (Atal Bihari Vajpayee's 94th birth anniversary) के मौके पर उनके स्मारक 'सदैव अटल' को 25 दिसंबर 2018 को राष्ट्र के नाम समर्पित किया गया है जो कि राजघाट क्षेत्र में स्थित है। यह स्मारक राष्ट्रीय स्मृति स्थल के पास बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को हुआ था और उनका निधन लम्बी बीमारी के बाद इस वर्ष 16 अगस्त 2018 को हो गया था जहां 17 अगस्त को वाजपेयी का अंतिम संस्कार किया गया था ।

अटल जी की समाधि पर कमल के फूल के आकार में एक खास स्फटिक (क्रिस्टल) थोड़ा पारदर्शी श्वेत पत्थर लगाया गया है जिसका आकर एक दीपक की ज्योति की तरह है जिसमें रात को लाइट ज्योति की तरह दिखाई देती है मानो कह रही हो कि साथियो, कूच के बाअद भी में आप सबको रौशनी देता रहूंगा… दिन में भी और रात में भी।अंदरूनी पंखुडियाँ और बाहरी पंखुडियॉं और पंखुडियों के बीच का स्थान जो बाहरी परिक्रमा का एक हिस्सा है, उसे क्रिस्टल येलो और नियो कॉपर ग्रेनाइट की रंग संरचना में रखा गया है। रास्तों में लैदर फिनिश काला ग्रेनाइट बिछाया गया है.

पहुँचने के रास्ते पर अटल जी की जीवन गाथा कहते विशाल सुचना पत हैं जो कि एक प्रकार की विशाल चमकदार पीतल की दीवार बना दी है जिसको पढ़ते समय देखने पर दर्पण का अहसास होता है ।

इसके अंदर भी रोशनी का प्रबंध ऐसे सुघड़ तरीके से किया गया है कि आपको ढूढ़ने पर भी कोई जोड़ नज़र नहीं आएगा। समाधि के चारों तरफ 8 दीवारें हैं, जिस पर अटलजी की विभिन्न कविताएं लिखीं हुई हैं। यह समाधि एक कवि, मानवतावादी राजनेता और एक महान नेता के रूप में उनके व्यक्तित्व को दर्शाती है| यहां 9 नक्काशी की हुई दीवारें हैं। समाधि के केंद्रीय मंच में चौकोर और काली पॉलिश वाले ग्रेनाइट के नौ ब्लॉक लगे हैं, जिसके केन्द्र में एक दीया रखा गया है. यह नौ की संख्या नवरसों, नवरात्रों और नवग्रहों का प्रतिनिधित्व करती है. नौ चौकोर पत्थरों की इस समाधि का मंच एक गोलाकार कमल के आकार में है जो कह रहा है मानो कमल अब खिला रहेगा । मंच तक चार प्रमुख दिशाओं से पहुंचा जा सकता है. इसके लिए खास सफेद मिश्रित टाइलों से मार्ग बनाये गये हैं ताकि फर्श गर्म न हो. इन टाइलों कि खास बात है कि 50 डिग्री सेंटग्रेड तक की भयंकर गर्मी में भी यह गर्म नहीं होंगे और ठन्डे बने रहेंगे और इस बात कि तस्दीक आप स्वयं कर सकते हैं.जब बराबर का काला ग्रेनाइट पूरा गर्म है लेकिन टाइल द्वारा बनाया गया क्षेत्र आज भी ठंडा है। सदैव अटल समाधि निर्माण में भव्यता का ध्यान रखा गया है। निर्माण में लाइटिंग का भी काफी इस्तेमाल किया गया है। समाधि के निर्माण में देश के विभिन्न हिस्सों से लाये गये पत्थरों का उपयोग किया गया है। इस प्रकार विविधता में एकता पर जोर दिया गया है।

इस समाधि को विकसित करने की पहल अटल स्मृति न्यास सोसायटी ने की थी जो प्रख्यात व्यक्तियों जैसे सुमित्रा महाजन, लालजी टंडन, ओ.पी. कोहली, वजुभाई रूदाभाई वाला, विजय कुमार मल्होत्रा, राम लाल और राम बहादुर रायद्वारा गठित की गई है और सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत पंजीकृत है इस समाधि का निर्माण कार्य सीपीडब्ल्यूडी ने 10.51 करोड़ रूपये की लागत से पूरा किया है z. समाधि निर्माण का पूरा खर्च 'अटल स्मृति न्यास सोसाइटी' ने उठाया है |

हमें अपन प्रयास पूरी ताकत से करने होंगे, अटल जी से हमें यह शिक्षा मिलती है। आइये नव वर्ष कि इस बेला में अटल जी के दर्शनों के लिए चलें सदैव अटल स्मारक।

Tags:    

Manish Kumar Gupta ( 30 )

Delhi Upto Date Contributors help bring you the latest news around you.


  Similar Posts

Share it
Top