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सुना है, हमें वो बुलाने लगे हैं तो क्या, हम उन्हें, याद आने लगे हैं?

 Ritu |  2019-03-07T16:56:48+05:30

सुना है, हमें वो बुलाने लगे हैं  तो क्या, हम उन्हें, याद आने लगे हैं?

नरेन्द्र धवन|

नई दिल्ली। कहते हैं कि राजनीति का एक सिद्धांत होता है, कि इसका कोई सिद्धांत नहीं होता और आज की आधुनिक राजनीति में तो यह सुस्पष्ट दिखाई देने लगा है। वर्ष 2013 में कांग्रेस को रौंदकर और वर्ष 2015 में समाप्त कर दिल्ली की राजनीति में आम आदमी पार्टी का जो आगाज हुआ, शायद यह सफलता ना तो आज से पहले कभी किसी दल या किसी व्यक्ति को मिली और ना भविष्य में कभी देखने को मिलेगी। दिल्ली की 70 सदस्य विधान सभा में से 67 सीट जीतकर कीर्तिमान बनाने वाली, कांग्रेस को दिल्ली की राजनीति से समाप्त करने और कांग्रेस से कभी समर्थन ना लेने का वादा कर अपने बच्चों को दांव लगाने वाली पार्टी एवम पार्टी मुखिया अरविंद केजरीवाल आज वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली की 7 संसदीय सीटों पर कांग्रेस से गठबंधन को आतुर हैं या यूं कहें कि सभी सिद्धांतों से पलटने वाले केजरीवाल एक बार फिर पलटी मार रहे हैं।

आखिर क्या वजह है कि उन्हें कांग्रेस के आगे गठबंधन के लिए गिड़गिड़ाना पडा और काँग्रेस है कि मानती ही नहीं, इस बात को दिल्ली के मुख्यमंत्री सार्वजनिक मंच से अनेक बार कह चुके हैं और दूसरी तरफ दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित लगातार मना कर रही हैं, कि कांग्रेस किसी से कोई भी गठबंधन दिल्ली में नहीं कर रही है। वर्ष 2015, 70 में से 67 सीटें जीतने वाली आम आदमी पार्टी शिक्षा स्वास्थ्य बिजली पानी और दिल्ली के विकास में निरंतर प्रगतिशील रहने का दावा करने वाली सत्ताधारी पार्टी इतना सब कुछ होने पर भी, जिस पार्टी का कोई वजूद दिल्ली में नहीं रहा था उस कांग्रेस के आगे गिडगिडा रही है। सोचने का विषय है, कहीं ऐसा तो नहीं है कि अरविंद केजरीवाल को अपने विधायकों और निगम पार्षदों की कारगुजारईयों की जानकारी मिल गई हो कि, वोटर का मन, पार्टी के चुने प्रतिनिधियों से हट रहा है।यह अंदाजा लग गया हो, तभी तो पूरी दिल्ली में जिस भी विधान सभा में देखिए बोर्ड, बैनर,आदि से स्थानीय विधायक आदि की फोटो गायब कर, एक बार फिर अरविंद के नाम का प्रचार पूरी दिल्ली में चल पड़ा है,जहां भी देखो अरविंद ही अरविंद की फोटो है, अब वोटर यह समझने लगा है कि राष्ट्रीय स्तर पर केवल कांग्रेस ही भाजपा को टक्कर दे सकती है। जैसा कि पिछले साल 5 राज्यों के चुनावों में साफ हो गया है जहां कांग्रेस तीन राज्यों में सरकार बनाने में कामयाब हुई वहीं आम आदमी पार्टी को पांचों राज्यों में जनता ने सिरे से नकार दिया है। कही अपना एवं पार्टी का अस्तित्व खतरे में देख अरविंद ने यह पहल की हो और अब जब कांग्रेस के साथ दाल नहीं गली तो विधानसभा में देश के शहीदों के पक्ष में और भाजपा एवं मोदी के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी कर पाकिस्तान को भारत के खिलाफ बोलने का मौका दे दिया है और पाकिस्तानी मीडिया के हीरो बन गए। यह कैसा मानसिक दिवालियापन है दिल्ली के मुख्यमंत्री का? सत्ता की चाहत में गैर जिम्मेदाराना हरकतें करते रहो। आप एक राज्य के मुख्यमंत्री हो कोई रोड पर चलने वाला अशिक्षित एवम असभ्य नागरिक नहीं।

आज पूरा देश चाहे किसी भी धर्म, राज्य का हो सबका फ़र्ज़ देश और सरकार के साथ खड़े होने का बनता है और आप कैसी राजनीति कर रहे हो? केवल अपने आपको सुर्खियों में रखने की चाहत,सत्ता से दूरी ना बन जाए, जो जी में आये आए कहते रहेंगे? यह नीति ठीक नहीं है अपने आप को संभालो वरना वह दिन दूर नहीं कि आप का भी हाल असम गण परिषद और उसके संस्थापक प्रफुल्ल कुमार महंत जैसा ना हो जाए और आपका राजनीतिक अस्तित्व ही समाप्त हो जाएं। क्योंकि ये जनता है, जिसके लिए देश सर्वोपरि है, सहानुभूति की, धर्म विशेष की राजनीति करना छोडि़ये, सभी को साथ लेकर चलिए और आगे बढिए।

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