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गिलगिट की आजादी के लिए अब ट्वीटर अभियान

 Ritu |  2 May 2019 10:27 AM GMT

गिलगिट की आजादी के लिए  अब ट्वीटर अभियान

(नरेन्द्र धवन)

नई दिल्ली। गिलगिट बालटिस्तान के लोग अब पाकिस्तान से अपनी आजादी का अभियान ट्वीटर पर चलाएंगे। पाकिस्तानी सेना के अत्याचार और उत्पीड़न के शिकार जम्मू कश्मीर के उत्तरी इलाके के तौर पर ज्ञात गिलगिट बालटिस्तान के लोग लम्बे अर्से से अपनी आजादी का आन्दोलन चला रहे हैं लेकिन दुनिया में उनकी कराहपूर्ण आवाज अनसुनी ही चल रही है। लेकिन अब गिलगिट बालटिस्तान के लोग अपने लोगों को पाकिस्तानी सेना के खिलाफ और उग्र बनाने के लिये ट्वीटर का सहारा लेंगे।

गिलगिट बालटिस्तान के लोगों ने यह अभियान गत 28 अप्रैल से शुरु किया क्योंकि 70 साल पहले इसी दिन 28 अप्रैल, 1949 को गिलगिट बालटिस्तान के इलाके को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी आजाद कश्मीर और पाकिस्तान के इलाके में एक संधि के जरिये मिलाया गया था। यहां गिलगिट बालटिस्तान के एक प्रतिनिधि ने बताया कि 1949 को सम्पन्न हुए कराची समझौते की 70 वीं सालगिरह के मौके पर गिलगित बालतिस्तान के लोगों ने ट्वीटर अभियान शुरु कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसकी वास्तविकता से अवगत कराने का अभियान शुरु कर चुके हैं।

गिलगिट बालटिस्तान के लोग अब तक पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों और पाकिस्तानी पुलिस प्रशासन के खिलाफ अहिंसक आन्दोलन चलाते रहे हैं लेकिन पाकिस्तानी सेना उन्हें बड़ी बेरहमी से कुचल देती है। वहां के लोग पाकिस्तानी शासन का विरोध करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते लेकिन उनकी आवाज को इसके लिये गिलगिट बालटिस्तान अवेयरनेस टीम बनाई गई है जो दुनिया को बताएगी कि किस तरह धोखे से गिलगित बालटिस्तान को आजाद कश्मीर (पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर इलाका) और पाकिस्तान का हिस्सा बनाया गया।

कराची समझौते के जरिये पाकिस्तान सरकार और आजाद कश्मीर सरकार के बीच सम्बन्धों की व्याख्या की गई थी। इसके जरिये पाकिस्तान सरकार और आजाद कश्मीर के बीच कार्य विभाजन तय किया गया था। इस समझेते के जरिये आजाद कश्मीर की सरकार ने गिलगिट झ्रबालटिस्तान पर पाकिस्तान के पूर्ण आधिपत्य की सहमति दी और इसके जरिये इस इलाके की रक्षा, विदेश और संचार नीति के संचालन का अधिकार पाकिस्तान सरकार को प्रदान किया। इस इलाके को तब नारदर्न एरियाज कहा जाता था। इसके तहत गिलगित और लद्दाख इलाकों के सभी मामलों की देखभाल की जिम्मेदारी पाकिस्तान सरकार को सौंपी गई।

जम्मू कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ क्रिसटोफर स्नीडेन ने इस बारे में टिप्पणी की है कि आजाद कश्मीर के तब के प्रधानमंत्री कहे जाने वाले सरदार इब्राहीम ने यह तर्क दिया था कि गिलगिट बालतिस्तान और आजाद कश्मीर के बीच सम्पर्क बहुत कमजोर है जब कि पाकिस्तान सरकार इस इलाके पर शासन पेशावर औऱ रावलपिंडी से बेहतर तरीके से कर सकती है।

गिलगिट बालटिस्तान के लोगों ने कराची समझौते का इस आधार पर विरोध किया था कि इसमें उनके जनप्रतिनिधियों का कोई प्रतिनिधित्व औऱ भूमिका नहीं थी। गौरतलब है कि गिलगिट बालटिस्तान के लोग अपने इलाके की आजादी की मांग के लिये संघर्ष कर रहे हैं। अपने अधिकारों औऱ आजादी की मांग करने वाले लोगों के साथ पाकिस्तान ब्रर्बर तरीके से पेश आती है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार ने गिलगिट बालटिस्तान को पाकिस्तान का पांचवां राज्य बनाने की कई बार कोशिश की है। इसके लिये उसने अपने संविधान में संशोधन का प्रस्ताव किया है। इस पर पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में एक आर्डर पारित किया था जिस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की थी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बारे में कहा था कि गिलगिट बालटिस्तान भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान ने ताजा विधेयक पारित कर भारत के अंदरुनी मामलों में हस्तक्षेप किया है। सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान के संवैधानिक दायरे को गिलगिट बालटिस्तान के इलाके तक मानने का आर्ड़र जारी किया था। यह भी कहा गया था कि इस इलाके में रहने वाले लोगों को उनका मौलिक अधिकार मिलेगा। इसका मतलब साफ है कि गिलगिट बालटिस्तान के लोगों को अब तक उनके मौलिक अधिकारों से वंचित रखा गया था।

भारत ने कहा है कि पाकिस्तान ने गिलगिट बालटिस्तान के इलाके पर अपना गैरकानूनी अधिकार जमाया है जिसे भारत पूरी तरह नामंजूर करता है। गिलगिट बालटिस्तान के उत्तर में चीन, पश्चिम में अफगानिस्तान, उत्तर पश्चिम में ताजिकिस्तान और दक्षिण पूर्व में कश्मीर का इलाका है। चीन का चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) इसी इलाके से होकर गुजरता है जहां ढांचागत और औद्योगिक विकास पर चीन ने 60 अरब डालर के महत्वागांक्षी विकास की योजना बनाई है। इस रास्ते चीन दो हजार किलोमीटर लम्बा राजमार्ग बना रहा है जिससे उसका शिनच्यांग इलाका जुड़ता है। यह राजमार्ग पाकिस्तान के बलुचिस्तान के ग्वादार बंदरगाह को जोड़ता है। इसलिये यह इलाका पाकिस्तान का बना रहे इसमें चीन का भी सामरिक हित जुड़ा है।

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