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सेक्शन 80C के अलावा इनकम टैक्स बचाने के अन्य तरीके:

 Manish Kumar Gupta |  4 Jun 2019 10:13 AM GMT

आयकर अधिनियम के सेक्शन 80C के अलावा इनकम टैक्स बचाने के अन्य इस प्रकार हैं जैसा कि हम जानते हैं नया वित्तीय वर्षअब प्रारंभ हो चुका है अतः टैक्स में बचत के लिए अभी से सोचना उचित रहेगा। हम सभी को अपनी कर बचत योजना इस तरह से बनानी चाहिए कि अधिक टैक्स जमा न हो, अपनी सभी छूटों का पूरे तरीके से लाभ ले लिया जाए और बाद के रिफंड का झंझट ही न रहे। अगर कानूनन एडवांस टैक्स बनता है तो वह भी सही समय पर ठीक ठीक जमा हो जाए और ब्याज देने की आवश्यकता ही न रहे।

वर्तमान में ज़्यादातर करदाता इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C के द्वारा दिए गए विकल्पों में निवेश करके टैक्स में बचत करना जानते हैं, और मेडिक्लेम का लाभ भी सेक्शन 80डी के अन्तर्गत लिया जाता है। मगर आज हम आपको कुछ ऐसी छूटों के बारे में बताएंगे जिसकी सभी को जानकारी नहीं है और जिनका लाभ लेना कई मामलों में छूट जाता है। इनकम टैक्स के नीचे दिए गए विकल्पों में भी करदाता अपने कर की बचत कर सकते हैं:

1.सेक्शन 80DD

मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति से निपटने के लिए लोग हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते हैं ताकि खुद को औरअपने परिवार के सदस्यों को समय पर समुचित इलाज उपलब्ध करा सकें।ये हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी न सिर्फ मेडिकल इमरजेंसी में आपके और परिवार के काम आते हैं, बल्कि यह कर की बचत करने में भी आपकी मदद करती है। इस सेक्शन के मुताबिक हेल्थ इंश्योरेंसके प्रीमियम पर टैक्स की छूट पायी जासकती है। यह हेल्थ इंश्योरेंस आपके और आपके परिवार के सदस्यों के लिए हो सकता है। यहाँ पर आपके परिवार से मतलब है की आपके पति या पत्नी, आप पर आश्रित आपके बच्चे या फिर आप पर आश्रित आपके माता पिता से है। भाई बहन या अन्य सम्बन्धी इस मामले में आपके परिवार का हिस्सा नहीं माने जाएंगे।

अगर किसी सामान्य व्यक्ति ने हेल्थ इंश्योरेंस के रूप में अपने या अपने परिवार के लिए प्रीमियम का भुगतान किया है तो वह व्यक्ति स्वयं सालाना 25000 रूपए तक के खर्चे पर टैक्स की छूट का लाभ उठा सकता है। यदि परिवार का कोई सदस्य सीनियर सिटीजन है तो सालाना 30000 रूपए तक की छूट भी प्राप्त कर सकता है। एक खासियत यह भी है कि अगर प्रीमियम का भुगतान करने की तिथि चाहे पहले हो या बाद की है तो आप उसका भुगतान वर्ष के दौरान कभी भी कर के टैक्स की छूट का लाभ उठा सकते हैं।

2.सेक्शन 80E

विदेश के शैक्षिक संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए आसानी से एजुकेशन लोन उपलब्ध हो जाता है | वह व्यक्ति जो खुद के लिए या अपने पति/पत्नी की शिक्षा के लिए या अपने बच्चों की शिक्षा केलिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी वित्तीय संस्थान या फिर चैरिटेबल संस्थान से लोन प्राप्त करता है तो उस लोन पर चुकाए गए ब्याज पर टैक्स की छूट प्राप्त कर सकता है।

यदि आपने लीगल गार्जियन की क्षमता में अपने परिवार के सदस्य के लिए एजुकेशन लोन लिया है तो भी आप उस लोन पर चुकाए गए ब्याज की टैक्स में छूट प्राप्त कर सकते हैं। इस सेक्शन में उसी व्यक्ति को टैक्स की छूट प्राप्त होगी जिसके नाम पर लोन मंजूर हुआ होगा अर्थात अगर किसी व्यक्ति ने अपने नाम पर अपने बच्चे के लिए एजुकेशन लोन प्राप्त किया है तो उसी व्यक्ति को टैक्स की छूट का लाभ उठाने का अधिकार होगा।जब से आप एजुकेशन लोन पर ब्याज चुकाना शुरू करते हैं उसके बाद से आठ साल तक ही आपको टैक्स कटौती मिल सकता है।

3.सेक्शन 80GG

इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80GG के अनुसार यदि आप कोई व्यापारी हैं और किराये के घर में रहते हैं तो आप उस घर के किराय पर टैक्स की छूट इस सेक्शन के माध्यम से पा सकते हैं।यह सेक्शन उन् लोगों के लिए भी लाभदायक है जो नौकरीपेशा हैं और उनके नियोक्ता द्वारा उन्हें मकान किराया भत्ता प्रदान नहीं किया जाता।

इस सेक्शन का लाभ प्राप्त करने के लिए आपको निम्नलिखित शर्तों का पूरा करना अनिवार्य है : a) करदाता अगर नौकरीपेशा व्यक्ति है तो उसने अपने नियोक्ता से मकान किराया भत्ता न लिया हो

b) करदाता किसी भी और आवासीय संपत्ति का मालिक न हो

c) करदाता को इस सेक्शन में लाभ प्राप्त करने के लिए फॉर्म 10BA का भरना अनिवार्य है।

4.सेक्शन 80U

इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80U के द्वारा विकलांग व्यक्ति स्वयं अपनी विकलांगता से जुड़े खर्चे परटैक्स की छूट का लाभ उठा सकते हैं। इस सेक्शन में टैक्स की छूट विकलांगता के स्तर के हिसाब से मिलती है।यदि व्यक्ति कम से कम 40% विकलांगता का शिकार है तो वह व्यक्ति स्वयं सालाना 75000 रूपए तक के खर्च पर टैक्स की छूट प्राप्त कर सकता है। यदि व्यक्ति कम से कम 80% विकलांगत का शिकार है तो वह व्यक्ति स्वयं सालाना 125000 रूपए तक के खर्च पर टैक्स की छूट प्राप्त कर सकता है। इस सेक्शन का लाभ उठाने के लिए करदाता को उपयुक्त चिकित्सा अधिकारी द्वारा विकलांग होने का प्रमाण पत्र लेना पड़ेगा।

निम्नलिखित में से किसी भी शारीरिक अक्षमता से ग्रस्त व्यक्ति को इस सेक्शन में लाभ प्राप्त हो सकता है : कम दिखाई देना; कोढ़ की बीमारी, सुनने की अक्षमता, लोको मोटर अक्षमता, मानसिक अक्षमता, मानकअयोग्यता

5.सेक्शन 80G

दान देकर इनकम टैक्स में छूट लेने का एक बहुत ही लाभदायक तरीका सेक्शन 80G इस के माध्यम से इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80G के माध्यम से आप किसी भी तरह की सामाजिक , राजनैतिक या फिर जनहितकारी संस्थाओं में दान देकर टैक्स की छूट प्राप्त कर सकते हैं।

इस सेक्शन में छूट प्राप्त करने के लिए कुछ शर्तों का पूरा होना ज़रूरी है। इस सेक्शन के ज़रिये हर केटेगरी के करदाता कर की छूट का लाभ उठा सकते हैं।यह टैक्स छूट आपकी ओर से दिए गए पुरे दान पर भी मिल सकती है या फिर उसके आधे हिस्से पर।

वह दान जिनके 100% हिस्से पर कर की छूट मिलती है:

a) राष्ट्रीय सुरक्षा कोष

b) प्रधानमंत्री राष्टीय राहत कोष

c) सरकारी निर्धन चिकित्सा राहत कोष

d) राष्ट्रीय बीमारी सहायता कोष

e) राष्ट्रीय या राज्यीय रक्त आधान परिषद

f) राष्ट्रीय खेल कोष

g) राष्ट्रीय सांस्कृतिक कोष

h) राष्ट्रीय बाल कोष i) मुख्यमंत्री राहत कोष वा आदि।

वह दान जिनके 50 % हिस्से पर टैक्स की छूट मिलती है :

a) जवाहर लाल नेहरू स्मारक कोष

b) प्रधानमंत्री सूखा राहत कोष

c) इंदिरा गांधी स्मारक ट्रस्ट

d) राजीव गांधी फांउंडेशन

सेक्शन 80G के तहत आप उन्ही दान या छंदों पर टैक्स की छूट प्राप्त कर सकते हैं जोकि आपने कैश के रूप में दिए हों। यदि आप वस्तु का दान करते हैं तो वह दान कर योग्य नहीं हैं । हालांकि वर्ष 2017-18 से नकद राशि दान करने की सीमा सिर्फ २००० रूपए तक ही कर दी गयी है | उससे अधिक राशि का दान करने के लिए आप चेक या ड्राफ्ट के रूप में कर सकते हैं। एक बात का विशेष ध्यान रखना ज़रूरी है की दान करते वक़्त उपयुक्त रसीद या प्रमाण लेना ना भूलें नहीं तो कर की छूट का लाभ नहीं मिलेगा।

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